ईरान में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन, दर्जनों की मौत की आशंका

इंटरनेट बंद, सड़कों पर भारी भीड़, सुरक्षा बलों की सख्ती

Virat
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Iran Protests

ईरान में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा सरकार विरोधी आंदोलन शुक्रवार रात और तेज हो गया। अलग-अलग रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि हिंसा में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, ईरानी सरकार ने अब तक मृतकों का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।

इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं के लगभग पूरी तरह बंद होने के बावजूद जो वीडियो बाहर आए हैं, उनमें देशभर में लाखों लोगों को सड़कों पर उतरते और सरकार विरोधी नारे लगाते देखा जा सकता है। कुछ फुटेज में खून से लथपथ शव जमीन पर पड़े दिखाई दे रहे हैं। कई जगह बुजुर्गों की मौजूदगी भी प्रदर्शनकारियों में साफ दिखी।

फर्दीस से सामने आए वीडियो, कई मौतों का दावा

तेहरान से करीब 50 किलोमीटर पश्चिम स्थित फर्दीस शहर से सामने आए मोबाइल वीडियो में एक इमारत के भीतर कम से कम सात शव दिखाई दे रहे हैं, जिन पर खून लगा है। वीडियो में कुछ लोग घायलों के सिर पर पट्टी बांधते और आंख पर इलाज करते नजर आते हैं। एक आवाज में यह दावा किया गया कि गोलीबारी में कम से कम 10 लोग मारे गए।
हालांकि, ब्लूमबर्ग ने स्पष्ट किया है कि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई, सख्त चेतावनी

ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने करीब 200 लोगों को “आतंकी समूहों के नेता” बताते हुए गिरफ्तार किया है। दावा किया गया है कि उनके पास से गोला-बारूद, हथगोले और मोलोटोव कॉकटेल बरामद किए गए हैं।

ईरान के अभियोजक जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आज़ाद ने चेतावनी दी है कि सभी हिरासत में लिए गए लोगों पर “खुदा के दुश्मन” होने का आरोप लगाया जाएगा। ईरानी कानून में यह आरोप मौत की सजा तक ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में सुनवाई बिना किसी देरी और नरमी के की जाएगी।

मानवाधिकार संगठनों के अलग आंकड़े

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी का कहना है कि 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 65 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,311 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विरोध की शुरुआत तेहरान में मुद्रा संकट और बिगड़ती आर्थिक स्थिति के खिलाफ व्यापारियों के प्रदर्शन से हुई थी, जो बाद में पूरे देश में फैल गया।

इस संगठन के अनुसार, चहारमहल-बख्तियारी, इलाम, केरमानशाह और फार्स प्रांतों में 38 मौतों की पहचान की गई है। वहीं, टाइम मैगजीन ने एक डॉक्टर के हवाले से दावा किया कि अकेले तेहरान में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है, जिनमें से ज्यादातर को जिंदा गोलियां लगीं।

इंटरनेट बंद, देश से संपर्क लगभग ठप

इंटरनेट मॉनिटरिंग ग्रुप नेटब्लॉक्स ने बताया है कि शनिवार तक ईरान में देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट जारी रहा। देश के भीतर लोग अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सेवाओं से लगभग कटे हुए हैं। दुनिया के कई हिस्सों में रहने वाले ईरानी नागरिकों ने बताया कि वे करीब दो दिनों से अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।

रज़ा पहलवी का आह्वान

इन प्रदर्शनों से पहले ईरान के पूर्व शाह के निर्वासित बेटे रज़ा पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की थी। उन्होंने शनिवार और रविवार को शाम छह बजे के बाद फिर से प्रदर्शन करने का आह्वान किया।
पहलवी ने कहा कि अब मकसद सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि शहरों के केंद्रों पर कब्जा कर उन्हें बनाए रखना है। उन्होंने तेल, गैस और परिवहन क्षेत्रों के कर्मचारियों से देशव्यापी हड़ताल शुरू करने की भी अपील की और कहा कि वे “वतन लौटने की तैयारी” कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय हलचल और सरकार का रुख

ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी शनिवार को तेहरान पहुंचे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। एक दिन पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि यह साफ नहीं है कि अलबुसैदी कोई संदेश लेकर आए हैं या नहीं।

ईरानी सरकारी टीवी ने प्रदर्शनों को कमतर दिखाने की कोशिश की और कहा कि शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने हालात काफी हद तक काबू में कर लिए थे। सेना ने भी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए कहा है कि वह देश के हितों और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करेगी।

सड़कों पर नारे और हिंसा

वीडियो फुटेज में “तानाशाह मुर्दाबाद”, “न गाज़ा, न लेबनान, मेरी जान ईरान के लिए” और “यह खून का साल है, सैयद अली गिरेंगे” जैसे नारे सुने गए हैं। ज़ाहेदान जैसे संवेदनशील शहरों में भी हिंसा की खबरें आई हैं, जहां शुक्रवार की नमाज़ के बाद प्रदर्शनकारियों पर गोली चलने का दावा किया गया है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार को प्रदर्शनकारियों की हत्या के खिलाफ चेतावनी दी है। वहीं, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के नेताओं ने भी ईरान से संयम बरतने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है।

 

VIA:fortune
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