अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज होता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को फांसी दी जाती है, तो अमेरिका “बहुत सख्त कार्रवाई” करेगा। ट्रंप ने यह बात एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कही।
ट्रंप ने कहा कि फिलहाल उन्हें इस बात की पुष्टि नहीं मिली है कि ईरान में फांसी की सज़ाएं दी जा रही हैं, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो यह एक ऐसी सीमा होगी, जिसे पार नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे सीधे तौर पर “रेड लाइन” बताया।
इरफान सोलतानी का मामला क्यों अहम है
इस बीच, ईरान ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट के मुताबिक 26 साल के प्रदर्शनकारी इरफान सोलतानी को मौत की सज़ा दी जा सकती है। बताया गया है कि उन्हें तेहरान के पास फर्दिस इलाके से गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उन्हें वकील तक पहुंच नहीं दी गई और उनके परिवार को फांसी से कुछ मिनट पहले ही सूचना दी गई। अगर ऐसा होता है, तो मौजूदा आंदोलन के दौरान यह पहली फांसी मानी जाएगी।
‘मदद रास्ते में है’, ट्रंप का संदेश
ट्रंप ने ईरान के लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे विरोध प्रदर्शन जारी रखें। उन्होंने यह भी कहा कि “मदद रास्ते में है।” इसके साथ ही अमेरिका ने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं और शर्त रखी है कि जब तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा नहीं रुकती, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी।
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) January 13, 2026
प्रदर्शन और मौतों के आंकड़े
ईरान में ये प्रदर्शन दिसंबर के अंत में बिगड़ती आर्थिक स्थिति के खिलाफ शुरू हुए थे, जो धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गए। सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के बीच मौतों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
एक ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा कि करीब 2,000 लोगों की मौत हुई है, हालांकि इसके लिए “आतंकियों” को जिम्मेदार ठहराया गया। वहीं, अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (HRANA) का कहना है कि अब तक 1,850 प्रदर्शनकारियों, सरकार से जुड़े 135 लोगों, नौ आम नागरिकों और नौ बच्चों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह सब इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद सामने आया है।
ईरानी नेतृत्व का सख्त रुख
शुरुआत में सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को होने दिया, लेकिन बाद में रुख कड़ा हो गया। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा कि “उपद्रवियों को उनकी जगह दिखानी चाहिए।” वहीं, अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आज़ाद ने चेतावनी दी कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को “ईश्वर का दुश्मन” माना जाएगा।
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि ईरान के अंदर हालात कितने संवेदनशील हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर नजरें टिकी हुई हैं।


