लक्समबर्ग से लेकर पाकिस्तान तक: जयशंकर ने भारत की विदेश नीति पर रखी साफ बात

यूरोप में साझेदारी, पड़ोसियों में भरोसा और पाकिस्तान को लेकर ‘अपवाद’ वाला रुख

Virat
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जयशंकर बोले: लक्समबर्ग अहम साझेदार, पाकिस्तान अपवाद

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोप दौरे के दौरान भारत की विदेश नीति के तीन अहम पहलुओं पर खुलकर बात की—लक्समबर्ग के साथ साझेदारी, दक्षिण एशिया में भारत की पड़ोसी नीति और पाकिस्तान के साथ रिश्तों की जटिल सच्चाई। उनके बयानों में साझेदारी का भरोसा भी था और पड़ोस को लेकर एक व्यावहारिक, अनुभव से निकला नजरिया भी।

लक्समबर्ग को भारत का “बहुत अहम” साझेदार बताया

फ्रांस और लक्समबर्ग की छह दिवसीय यात्रा पर गए जयशंकर ने लक्समबर्ग के प्रधानमंत्री लुक फ्राइडन और उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री जेवियर बेटेल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत लक्समबर्ग को न सिर्फ द्विपक्षीय स्तर पर, बल्कि यूरोपीय संघ के भीतर भी एक “बहुत महत्वपूर्ण” साझेदार मानता है।

जयशंकर के मुताबिक, भारत-यूरोप संबंध जिस दौर से गुजर रहे हैं, उसमें लक्समबर्ग की भूमिका और उसका समर्थन भारत के लिए खास मायने रखता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार का आधार पहले से मजबूत है और अब फिनटेक, स्पेस, डिजिटल सेक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी गुंजाइश है।

बाद में सोशल मीडिया पर जयशंकर ने इस बैठक को “बेहतरीन” बताया और कहा कि बातचीत में निवेश, डिजिटल तकनीक, एआई, स्पेस और टैलेंट मोबिलिटी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

पड़ोसियों के लिए भारत क्यों बना भरोसेमंद देश

लक्समबर्ग में भारतीय समुदाय से बातचीत के दौरान जयशंकर ने भारत की पड़ोसी नीति पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि समय के साथ भारत दक्षिण एशिया में एक भरोसेमंद पड़ोसी के रूप में उभरा है।

उन्होंने श्रीलंका में चक्रवात, म्यांमार और अफगानिस्तान में भूकंप जैसे संकटों का जिक्र करते हुए कहा कि जब किसी देश पर बड़ी आपदा आती है और उसके पास उससे निपटने की क्षमता नहीं होती, तो वह स्वाभाविक रूप से ऐसे देश की ओर देखता है जो मदद कर सके। जयशंकर के अनुसार, इस क्षेत्र में अब यह धारणा बन चुकी है कि भारत ऐसा देश है जिस पर भरोसा किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यह भरोसा अचानक नहीं बना। कोविड महामारी के दौरान पड़ोसी देशों को पहली वैक्सीन भारत से मिली। यूक्रेन युद्ध के बाद जब ऊर्जा संकट खड़ा हुआ, तब भी भारत आगे आया। उनके शब्दों में, यह विश्वास अनुभव से निकला है, बयानबाजी से नहीं।

पाकिस्तान को बताया ‘अपवाद’

पड़ोस की बात करते हुए जयशंकर ने पाकिस्तान को एक “अपवाद” बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में शायद ही कोई और देश हो, जिसने दशकों तक बड़े शहरों में खुले तौर पर आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर चलने दिए हों और जहां राज्य व सेना आतंकवाद को समर्थन दें।

जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान की यह नीति अब किसी को स्वीकार्य नहीं है। इसे सामान्य बताने की कोशिशें भी अब नहीं चलतीं। उन्होंने इसे एक “कड़वी सच्चाई” बताया, लेकिन साथ ही कहा कि भारत ने अब अपनी नीति इसी हकीकत को ध्यान में रखकर बनाई है।

उनके मुताबिक, भारत जानता है कि यह पड़ोसी किस तरह की सोच और व्यवहार के साथ आगे बढ़ता है, और उसी समझ के आधार पर भारत अपनी रणनीति तय कर रहा है।

कुल मिलाकर जयशंकर के बयान यह दिखाते हैं कि भारत एक तरफ यूरोप में साझेदारी मजबूत करने पर जोर दे रहा है, वहीं अपने पड़ोस में अनुभव आधारित भरोसे की नीति अपना रहा है—और पाकिस्तान के मामले में किसी भ्रम में नहीं है।

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