जापान में सोमवार को 7.6 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया, जिसके बाद देश की मौसम एजेंसी ने तुरंत सुनामी चेतावनी जारी की। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि तटीय इलाकों में 10 फीट तक ऊंची सुनामी लहरें उठ सकती हैं। भूकंप का केंद्र समुद्र में था, जिससे कई क्षेत्रों में जोरदार झटके महसूस किए गए और लोग घरों से बाहर निकल आए।
मुख्य तथ्य
- जापान में 6-magnitude का भूकंप, झटके 1 मिनट से अधिक महसूस हुए।
- होक्काइडो, आओमोरी और इवाते में 10 फीट तक सुनामी की चेतावनी।
- भूकंप का केंद्र तट से 80 किमी दूर समुद्र में, गहराई 32 मील।
- रेलवे सेवाएँ प्रभावित; न्यूक्लियर प्लांट्स में safety checks शुरू।
- PTWC ने कहा—जापान और रूस के तटों पर भी सुनामी का खतरा संभव।
जापान में सोमवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई जब देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में 7.6 तीव्रता का भीषण भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार रात 7:45 बजे के करीब आया, जिसका केंद्र आओमोरी प्रान्त से लगभग 80 किलोमीटर दूर समुद्र में था। गहराई 32 मील बताई गई।
भूकंप के तुरंत बाद ही JMA ने होक्काइडो, आओमोरी और इवाते के तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी चेतावनी जारी कर दी, जिसमें 10 फीट तक ऊंची लहरों की आशंका जताई गई। स्थानीय प्रशासन ने सार्वजनिक स्पीकरों के माध्यम से लोगों को उच्च स्थानों पर तुरंत जाने की सलाह दी। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए जिनमें चेतावनी सायरन साफ सुनाई दे रहे थे।
जापान की तीन-स्तरीय सुनामी चेतावनी प्रणाली
जापान में सुनामी अलर्ट तीन श्रेणियों में जारी किए जाते हैं—
- Major Tsunami Warning: 3 मीटर से अधिक ऊंची लहरें, तटवर्ती इलाकों में भारी तबाही की आशंका।
- Tsunami Warning: 3 मीटर तक लहरें, निम्न इलाकों में पानी घुसने का खतरा, तत्काल निकासी जरूरी।
- Tsunami Advisory: 1 मीटर तक लहरें, समुद्र में मौजूद लोगों को तुरंत बाहर आने की चेतावनी।
इस घटना में JMA ने पहले दो स्तरों पर चेतावनियाँ दीं, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
न्यूक्लियर प्लांट्स में सुरक्षा जांच शुरू
जापान के पब्लिक ब्रॉडकास्टर NHK के अनुसार, प्रभावित इलाकों के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों ने तुरंत safety protocols सक्रिय करते हुए संरचनाओं की जांच शुरू कर दी। भले ही किसी भी प्लांट से कोई रिसाव या खतरे की सूचना नहीं मिली हो, लेकिन 2011 की फुकुशिमा आपदा के अनुभव के चलते जापान हर बड़े भूकंप के बाद सतर्कता को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
यातायात एवं सार्वजनिक जीवन प्रभावित
भूकंप के झटकों के चलते कई शहरों में बिजली की आपूर्ति बाधित हुई और कुछ रेलवे लाइनों पर सेवाएँ रोक दी गईं। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, East Japan Railway ने प्रभावित क्षेत्रों में कुछ ट्रेन सेवाएँ अस्थायी रूप से रद्द कर दीं।
लोगों ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि झटके इतने तेज थे कि घरों की छतों पर लगे लाइटें और पंखे कई सेकंड तक हिलते रहे। कई निवासी घबराकर खुले स्थानों में आ गए।
जापान क्यों है भूकंप का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट?
जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप-प्रवण देशों में शामिल है। भूकंप लगभग हर पाँच मिनट में कहीं न कहीं दर्ज किए जाते हैं।
यह देश “Ring of Fire” नामक क्षेत्र में स्थित है, जहाँ ज्वालामुखी, समुद्री ट्रेंच और टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियाँ बहुत अधिक होती हैं।
वैश्विक स्तर पर 6.0 या उससे अधिक तीव्रता के लगभग 20% भूकंप अकेले जापान में आते हैं।


