असम के पश्चिमी कार्बी आंगलोंग जिले में हुई हालिया हिंसा ने सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। भूमि विवाद से शुरू हुआ विरोध देखते-ही-देखते हिंसक झड़प में बदल गया।
इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी जिलों में सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था की चुनौती को उजागर किया है।
मुख्य तथ्य
- 22–23 दिसंबर को पश्चिमी कार्बी आंगलोंग में हिंसा
- कुल 173 सुरक्षाकर्मी घायल
- असम पुलिस और CRPF के जवान शामिल
- दो लोगों की मौत हुई
- भूख हड़ताल के बाद हालात बिगड़े
22 और 23 दिसंबर को पश्चिमी कार्बी आंगलोंग जिले में हुई हिंसा के दौरान कुल 173 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। इनमें असम पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान शामिल हैं। इस झड़प में दो लोगों की जान भी गई। घटनाएं खेरोनी इलाके में सामने आईं, जहां हालात अचानक बेकाबू हो गए।
हिंसा की पृष्ठभूमि
यह हिंसा कार्बी समुदाय द्वारा की जा रही 15 दिनों की भूख हड़ताल से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी गांव चराई आरक्षित भूमि और प्रोफेशनल ग्रेज़िंग रिज़र्व की जमीन से कथित अवैध बसने वालों को हटाने की मांग कर रहे थे। 22 दिसंबर को पुलिस द्वारा तीन आंदोलनकारियों को स्वास्थ्य कारणों के चलते प्रदर्शन स्थल से हटाया गया, जिसके बाद तनाव बढ़ गया।
🚨Kheroni Ghat No.1 & the PGR Land Claim — Facts on Record with exclusive proofs.
Read this thread exposing opposition's divisive anti-Hindu politics in Assam.👇
On 07/12/1983, the Assistant Settlement Officer (ASO), Donka Circle, under the then Karbi Anglong District Council… pic.twitter.com/Lt7x2Lbfzb
— DeepDownAnalysis (@deepdownanlyz) December 27, 2025
घटना के दौरान क्या हुआ
23 दिसंबर को खेरोनी इलाके में स्थिति हिंसक हो गई। पुलिस फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति की अपने ही घर में जलकर मौत हो गई। इसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया और हालात को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और कदम
हिंसा के बाद कार्बी आंगलोंग और पश्चिमी कार्बी आंगलोंग जिलों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। 26 दिसंबर को राज्य सरकार, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद और प्रदर्शनकारियों के बीच त्रिपक्षीय बैठक हुई। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भरोसा दिलाया कि चराई भूमि से जुड़े मामलों में गुवाहाटी हाईकोर्ट से जल्द आदेश लेने की कोशिश की जाएगी।
निष्कर्ष
कार्बी आंगलोंग की यह घटना दिखाती है कि लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद किस तरह अचानक हिंसा में बदल सकते हैं। फिलहाल सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रशासनिक कदमों के जरिए हालात पर नजर रखी जा रही है।
Q&A Section
Q1: कार्बी आंगलोंग हिंसा में कितने सुरक्षाकर्मी घायल हुए?
इस हिंसा में कुल 173 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें असम पुलिस और CRPF शामिल हैं।
Q2: हिंसा की मुख्य वजह क्या बताई गई है?
हिंसा की वजह चराई आरक्षित भूमि से कथित अवैध बसने वालों को हटाने की मांग को लेकर चल रहा विरोध रहा।


