किताबें, किरदार और यक़ीन

इस बीच,
सच की दुनिया
कहीं गुम रहती है।
सब कुछ
यक़ीन तय करता है
जिस पर यक़ीन हो,
वही सच होता है।
चाहे किताबों की दुनिया हो,
या किरदारों की।
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इस बीच,
सच की दुनिया
कहीं गुम रहती है।
सब कुछ
यक़ीन तय करता है
जिस पर यक़ीन हो,
वही सच होता है।
चाहे किताबों की दुनिया हो,
या किरदारों की।