ख़ुद से रंज़िश

“ख़ुद से रंज़िश”
— मनु
ना जाने किस बात की रंज़िश है ख़ुद से,
समय ख़ुद ग़ुलाम है,
बिखरे हुए आसमान का —
या शायद,
परिंदे उड़ना भूल गए।
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“ख़ुद से रंज़िश”
— मनु
ना जाने किस बात की रंज़िश है ख़ुद से,
समय ख़ुद ग़ुलाम है,
बिखरे हुए आसमान का —
या शायद,
परिंदे उड़ना भूल गए।
Waah, kya hi kahein,
#umda