पति की हत्या के बाद कैसे राजनीति में आईं खालिदा जिया और बनीं देश की पहली महिला प्रधानमंत्री

एक सामान्य घरेलू जीवन से सत्ता के शिखर तक पहुंचने का सफर, जिसने बांग्लादेश की राजनीति को दशकों तक प्रभावित किया

Virat
Virat
By
7 Min Read
खालिदा जिया

बांग्लादेश की राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जिनके साथ पूरा एक दौर जुड़ा होता है। बेगम खालिदा जिया उन्हीं नामों में से एक थीं। मंगलवार सुबह 80 साल की उम्र में उनके निधन के साथ ही बांग्लादेश की सियासत का एक लंबा अध्याय समाप्त हो गया।

खालिदा जिया लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके जाने की खबर ने सिर्फ उनके समर्थकों को ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति को एक बार फिर पीछे मुड़कर देखने पर मजबूर कर दिया है। खास बात यह रही कि राजनीति में उनका प्रवेश किसी तैयारी या महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि एक निजी त्रासदी से हुआ था।

BNP ने की निधन की पुष्टि

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सोशल मीडिया के जरिए खालिदा जिया के निधन की पुष्टि की। पार्टी के मुताबिक, उनका निधन मंगलवार सुबह करीब 6 बजे फज्र की नमाज के तुरंत बाद हुआ। इसके साथ ही पार्टी ने देशवासियों से उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ करने की अपील की।

उनके निधन पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त किया।

एक सामान्य बचपन, राजनीति से कोई नाता नहीं

खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को ब्रिटिश भारत के दिनाजपुर जिले में हुआ था, जो अब बांग्लादेश का हिस्सा है। उनका शुरुआती जीवन पूरी तरह सामान्य था। न तो राजनीति का माहौल था और न ही किसी बड़े सार्वजनिक मंच से उनका कोई जुड़ाव।

उनकी जिंदगी का रुख तब बदला, जब 1960 में महज 15 साल की उम्र में उनका निकाह बांग्लादेश के सैन्य अधिकारी जियाउर रहमान से हुआ। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यह रिश्ता आगे चलकर बांग्लादेश की राजनीति की दिशा तय करेगा।

पति की हत्या ने बदली जिंदगी की दिशा

खालिदा जिया की राजनीतिक यात्रा किसी चुनावी मंच से नहीं, बल्कि एक गहरे व्यक्तिगत सदमे से शुरू हुई। जियाउर रहमान 1977 से 1981 तक बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे और उन्होंने ही 1978 में BNP की स्थापना की थी।

1981 में एक सैन्य तख्तापलट के दौरान जियाउर रहमान की हत्या कर दी गई। इस घटना ने खालिदा जिया को पूरी तरह बदल दिया। पति की हत्या के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और धीरे-धीरे BNP की जिम्मेदारी संभाल ली।

राजनीति में मजबूती और पहला बड़ा मुकाम

पति की मौत के बाद खालिदा जिया ने पार्टी को संभालते हुए खुद को एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया। 1991 में बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली के बाद हुए चुनाव उनके लिए निर्णायक साबित हुए।

khaleda-zia
khaleda-zia

इस चुनाव में BNP की जीत हुई और खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि एक ऐसे देश में महिला नेतृत्व की बड़ी मिसाल भी थी, जहां राजनीति लंबे समय तक पुरुषों के कब्जे में रही।

प्रधानमंत्री के तौर पर तीन कार्यकाल

खालिदा जिया 1991, 1996 और 2001 में प्रधानमंत्री रहीं। उनके कार्यकाल के दौरान राष्ट्रवाद, सेना की भूमिका, प्रशासनिक ढांचा और भारत-बांग्लादेश संबंध जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे।

समर्थकों के लिए वे एक सख्त और निर्णायक नेता थीं, जबकि आलोचकों का कहना रहा कि उनके शासन में टकराव और राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ा।

विवाद, आरोप और सियासी टकराव

2001 से 2006 के बीच उनका तीसरा कार्यकाल सबसे ज्यादा विवादों में रहा। इस दौर में उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा, प्रशासनिक कमजोरियों और कट्टरपंथी तत्वों को बढ़ावा देने जैसे आरोप लगे।

इसी समय उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के तौर पर शेख हसीना उभरकर सामने आईं। दोनों नेताओं के बीच की सियासी प्रतिस्पर्धा ने दशकों तक बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित किया।

इस्तीफा, जेल और कानूनी लड़ाई

2006 में बढ़ते विरोध के बीच खालिदा जिया को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद देश में राष्ट्रपति शासन लगा और 2008 के चुनावों में अवामी लीग सत्ता में आई।

इसके बाद खालिदा जिया पर कई मामलों में मुकदमे दर्ज हुए। 2018 में भ्रष्टाचार के मामलों में उन्हें जेल भेजा गया। जेल के दौरान उनकी सेहत लगातार बिगड़ती चली गई।

हालांकि, स्वास्थ्य कारणों से 2020 में उनकी सजा निलंबित कर दी गई और बाद में 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।

बीमारी से जूझते हुए आखिरी दिन

खालिदा जिया कई सालों से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। इलाज के लिए वे कई बार विदेश भी गईं। इसी साल मई में यूनाइटेड किंगडम से इलाज कराकर वे ढाका लौटी थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें लीवर सिरोसिस, गठिया, मधुमेह और हृदय संबंधी समस्याएं थीं। आखिरकार मंगलवार सुबह उनका निधन हो गया।

भारत के साथ संबंधों को लेकर विवाद

खालिदा जिया के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध अक्सर तनावपूर्ण रहे। उन पर पाकिस्तान समर्थक रुख अपनाने और भारत विरोधी ताकतों को बांग्लादेश की धरती इस्तेमाल करने देने जैसे आरोप लगते रहे।

पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद और घुसपैठ के मामलों में बढ़ोतरी को लेकर भी उनके शासनकाल पर सवाल उठे।

एक युग का अंत

खालिदा जिया का जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि कैसे परिस्थितियां एक सामान्य महिला को देश की सबसे ताकतवर नेता बना सकती हैं। पति की हत्या से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर सत्ता, संघर्ष, विवाद और लंबी बीमारी तक फैला रहा।

उनके निधन के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति में एक ऐसा दौर समाप्त हो गया, जिसे आने वाली पीढ़ियां लंबे समय तक याद रखेंगी।

Share This Article
Leave a Comment