Maduro की गिरफ्तारी: वेनेजुएला में अमेरिका की वापसी और तेल की राजनीति

राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के साथ अमेरिका ने वेनेजुएला में सीधा सैन्य दखल दिया है। यह कदम न सिर्फ लैटिन अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेप की वापसी का संकेत देता है, बल्कि 200 साल पुराने मुनरो डॉक्ट्रिन को नए नाम और नए मकसद के साथ फिर जिंदा करता दिखता है।

Virat
6 Min Read
Maduro की गिरफ्तारी: वेनेजुएला में अमेरिका की वापसी

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी विशेष बलों द्वारा गिरफ्तारी ने एक बार फिर उस सवाल को सामने ला दिया है, जिसे अमेरिका बार-बार पीछे छोड़ने का दावा करता रहा है—क्या वह अब भी दूसरे देशों में अपनी शर्तों पर दखल देता है?

पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल का मशहूर वाक्य—“अगर आप तोड़ते हैं, तो उसके मालिक आप ही होते हैं”—इस घटनाक्रम पर सटीक बैठता है। 2003 में इराक युद्ध के संदर्भ में कही गई यह बात अब वेनेजुएला पर लागू होती दिख रही है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने सत्ता में आने के दौरान खुद को ‘शांति स्थापित करने वाला’ बताया था और इराक युद्ध के खुले आलोचक रहे हैं, अब उसी रास्ते पर लौटते नजर आ रहे हैं। रविवार को दिए गए एक बयान में उन्होंने वेनेजुएला में कार्रवाई को 1823 के मुनरो डॉक्ट्रिन के अनुरूप बताया—एक ऐसा सिद्धांत, जो यूरोपीय ताकतों को पश्चिमी गोलार्ध से दूर रखने के नाम पर अमेरिका के प्रभाव को वैध ठहराता रहा है।

डॉन-रो डॉक्ट्रिन’ की वापसी

ट्रंप ने मुनरो डॉक्ट्रिन को नए अंदाज में डॉन-रो डॉक्ट्रिन” नाम दिया है। यह सिद्धांत पिछले कई दशकों से अमेरिकी विदेश नीति के हाशिये पर था। अधिकतर प्रशासन इससे दूरी बनाने की कोशिश करते रहे, क्योंकि इसे लैटिन अमेरिका में हस्तक्षेप का बहाना माना जाता था।

लेकिन ट्रंप ने पिछले महीने जारी नई अमेरिकी सुरक्षा रणनीति में इसके संकेत दिए थे। मादुरो की गिरफ्तारी के साथ यह साफ हो गया कि अमेरिका इस पुराने सिद्धांत को फिर से सक्रिय रूप से लागू करने को तैयार है।

सिर्फ वेनेजुएला ही क्यों?

इस सवाल का जवाब ज्यादा जटिल नहीं है।
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चा तेल भंडार है—करीब 300 अरब बैरल। यह वैश्विक भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा है। इसके बावजूद देश का मौजूदा तेल उत्पादन बेहद कम है—करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन, जो वैश्विक उत्पादन का एक फीसदी से भी कम है।

अमेरिका की नजर लंबे समय से इस विरोधाभास पर रही है। ट्रंप ने खुलकर कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल भंडार पर नियंत्रण करेगा और अपनी बड़ी तेल कंपनियों को वहां निवेश के लिए भेजेगा। उनका दावा है कि अमेरिकी कंपनियां अरबों डॉलर लगाकर वहां की “टूटी हुई” तेल संरचना को दुरुस्त करेंगी।

इस संदर्भ में यह भी अहम है कि शेवरॉन फिलहाल वेनेजुएला में सक्रिय एकमात्र बड़ी विदेशी तेल कंपनी है—और वह भी अमेरिकी है।

तेल और राजनीति का पुराना रिश्ता

आलोचकों का कहना है कि वेनेजुएला में कार्रवाई का असली कारण लोकतंत्र या कानून नहीं, बल्कि तेल है। कई विश्लेषकों ने यह भी इशारा किया है कि यह कदम अमेरिका के भीतर चल रहे विवादों और दबावों से ध्यान हटाने की कोशिश हो सकता है।

लैटिन अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेप का इतिहास लंबा रहा है। 1898 से 1994 के बीच अमेरिका ने इस क्षेत्र में कम से कम 41 बार सरकारें बदलने में भूमिका निभाई। आधिकारिक कारण चाहे साम्यवाद रोकना रहा हो या सुरक्षा हित, आलोचकों के मुताबिक असल वजह अक्सर रणनीतिक और आर्थिक फायदे रहे हैं।

मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ बनाम नई जमीनी हकीकत

ट्रंप का ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ नारा विदेशों में अंतहीन युद्ध खत्म करने के वादे पर टिका रहा है। ऐसे में वेनेजुएला को लेकर उनका यह रुख उनके अपने समर्थकों के लिए भी असहज करने वाला है।

ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला को तब तक “चलाएगा” जब तक वहां सुरक्षित और उचित सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता। लेकिन इसका मतलब क्या होगा—यह उन्होंने साफ नहीं किया।

इसी वजह से उनके अपने खेमे से भी विरोध की आवाजें उठने लगी हैं। कुछ नेताओं ने इसे वही पुरानी अमेरिकी सैन्य आक्रामकता बताया है, जिसका खर्च अमेरिकी नागरिकों को उठाना पड़ता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका वेनेजुएला में लंबे समय तक मौजूद रहेगा या वहां अपने अनुकूल सरकार बनवाने की कोशिश करेगा। ट्रंप ने संकेत दिया कि अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज सहयोग के लिए तैयार हैं, लेकिन रोड्रिगेज ने तुरंत इस दावे को खारिज करते हुए अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की।

सवाल यह भी है कि मादुरो के बिना बची हुई सत्ता संरचना कितनी स्थिर रह पाएगी। क्या अंदरूनी मतभेद बढ़ेंगे? क्या विपक्ष इस मौके का फायदा उठा पाएगा?

पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव, जिन पर पहले से ही विवाद है, अब फिर से चर्चा में हैं। विपक्ष का दावा रहा है कि एडमूंडो गोंजालेज ने चुनाव जीता था, लेकिन मादुरो सत्ता में बने रहे। नोबेल पुरस्कार विजेता मारिया कोरीना मचाडो की भूमिका भी फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है।

वेनेजुएला के लिए आने वाले कुछ हफ्ते निर्णायक होंगे। लेकिन इतना साफ है कि मादुरो की गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है। यह अमेरिका की बदली हुई विदेश नीति, पुराने सिद्धांतों की वापसी और तेल के इर्द-गिर्द घूमती वैश्विक राजनीति की नई कड़ी है।

 

Share This Article
Leave a Comment