मणिकर्णिका घाट विवाद: ‘मढ़ी’ हटाने पर बवाल, सरकार ने मंदिर-प्रतिमा तोड़ने के आरोप किए खारिज

मणिकर्णिका तीर्थ कॉरिडोर परियोजना के तहत एक संरचना हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद जाकर किया निरीक्षण।

Priyanka
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मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास के दौरान हटाई गई एक मढ़ी को लेकर उठे विवाद के बीच जारी निर्माण कार्य।

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे मणिकर्णिका तीर्थ कॉरिडोर विकास कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। निर्माण के दौरान एक मढ़ी (ऊंचा चबूतरा) हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर बुलडोजर की तस्वीरें वायरल हुईं। कुछ तस्वीरों में प्रतिमाएं जमीन पर पड़ी दिखीं, जिसके बाद आरोप लगे कि विकास के नाम पर प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है।

यह विवाद जल्द ही राजनीतिक रंग लेने लगा। विपक्षी नेताओं ने इसे काशी की परंपरा और सनातन आस्था पर हमला बताते हुए सरकार को घेरा।

मुख्यमंत्री ने मौके पर जाकर देखा हालात

मामला बढ़ने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद मणिकर्णिका घाट पहुंचे। उन्होंने परियोजना कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक की और घाट पर विकसित की जा रही शवदाह संरचनाओं का निरीक्षण किया।

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि मंदिर या प्रतिमा तोड़ने के आरोप पूरी तरह गलत हैं। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कई तस्वीरें भ्रामक हैं और कुछ तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाई गई बताई जा रही हैं।
“किसी भी मंदिर या प्रतिमा को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है,” उन्होंने कहा और इसे जानबूझकर फैलाया जा रहा भ्रम बताया।

प्रशासन का पक्ष क्या है

जिला प्रशासन के मुताबिक, निर्माण के दौरान सिर्फ एक मढ़ी हटाई गई है। अधिकारियों ने माना कि इस प्रक्रिया में वहां रखी कुछ प्रतिमाएं नीचे आ गई थीं, लेकिन कोई भी प्रतिमा क्षतिग्रस्त नहीं हुई

वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि सभी प्रतिमाओं को सुरक्षित रूप से संरक्षित कर लिया गया है और फिलहाल उन्हें पुरातत्व विभाग के कार्यालय में रखा गया है।
उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका तीर्थ का विकास पूरा होने के बाद सभी प्रतिमाओं को पूरे सम्मान के साथ दोबारा स्थापित किया जाएगा।

मेयर अशोक तिवारी ने भी स्पष्ट किया कि घाट पर स्थित किसी भी मंदिर संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है।

घाट की जमीनी स्थिति

घाट का निरीक्षण करने पर सामने आया कि मणिकर्णिका के प्रमुख मंदिर—मसान मंदिर, तारकेश्वर मंदिर और रत्नेश्वर मंदिर—पूरी तरह सुरक्षित हैं। हालांकि, एक मढ़ी और कुछ सहायक पुरानी संरचनाओं को पुनर्विकास के तहत हटाया गया है।

घाट के कुछ पुजारियों का कहना है कि मढ़ी कोई मंदिर नहीं थी, लेकिन वहां प्रतिमाएं होने के कारण लोगों की आस्था उससे जुड़ी हुई थी।
पुजारी निमिष द्विवेदी और दीपक आचार्य ने कहा कि विकास से उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन भारी मशीनों के इस्तेमाल से बचा जा सकता था। उनके मुताबिक, अधिक संवेदनशील तरीके से काम किया जाना चाहिए था।

क्यों बन रहा है मणिकर्णिका तीर्थ

मणिकर्णिका तीर्थ परियोजना की शुरुआत घाट की बदहाल स्थिति को देखते हुए की गई। शुरुआती चरण में यह लगभग 3,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली है, जिसे आगे चलकर 39,350 वर्ग मीटर तक विस्तार दिया जाएगा। इसके पूरा होने पर एक साथ 19 चिताओं पर अंतिम संस्कार की सुविधा होगी, साथ ही शोक संतप्त परिवारों के लिए बैठने, सफाई और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

यह परियोजना तब शुरू हुई जब मणिकर्णिका के डोम राजा विश्वनाथ चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से घाट के आधुनिकीकरण की मांग की। उनका कहना था कि संकरी गलियों, भीड़, गंदगी और जगह की कमी के कारण अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को भारी परेशानी होती है, खासकर मानसून में हालात और खराब हो जाते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2023 में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। इसे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के एसआईआर फंड से वित्तपोषित किया जा रहा है और रूप फाउंडेशन इसे लागू कर रहा है।

आगे कैसी होगी परियोजना

परियोजना से जुड़े प्रबंधकों के मुताबिक, मणिकर्णिका तीर्थ का स्वरूप काशी कॉरिडोर के विस्तार जैसा होगा। इसमें बेहतर पहुंच, स्वच्छता, बैठने की व्यवस्था और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सुव्यवस्थित स्थान होंगे। साझा किए गए विजुअल्स में बहु-स्तरीय प्लेटफॉर्म दिखाया गया है, जिससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगी।

विवाद, भरोसा और संतुलन

आहिल्याबाई होलकर परिवार और पाल समुदाय से जुड़े लोगों के विरोध के बाद मामला और गरमा गया, जिसे विपक्षी दलों ने भी उठाया। सरकार का कहना है कि सभी धार्मिक वस्तुएं सुरक्षित हैं और काम पूरा होने के बाद उन्हें फिर से स्थापित किया जाएगा।

फिलहाल, मणिकर्णिका तीर्थ परियोजना आस्था, विरासत और शहरी विकास के बीच संतुलन का विषय बन गई है—एक संतुलन, जिसे बनाए रखने का भरोसा प्रशासन लगातार जता रहा है।

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