भारत की खुफिया एजेंसियों ने एक बड़ा खुलासा किया है। पाकिस्तान स्थित हैंडलर, नेपाल के रास्ते भारत से सिम कार्ड मंगवाकर, भारतीय सेना के 75 जवानों से संपर्क में थे। दिल्ली से गिरफ्तार नेपाली नागरिक के पास से मिले 16 सिम कार्डों की तकनीकी जांच में यह हैरान करने वाला जासूसी नेटवर्क सामने आया है।
मुख्य तथ्य
- दिल्ली में 28 अगस्त को नेपाली नागरिक प्रभात कुमार चौरासिया की गिरफ्तारी से खुलासा।
- आरोपी के पास से 16 भारतीय सिम कार्ड बरामद, जिनमें से 11 पाकिस्तान में ऑपरेट हो रहे थे।
- ISI हैंडलरों ने इन सिम से भारतीय सेना और सरकारी अफसरों से व्हाट्सएप पर संपर्क किया।
- आरोपी को अमेरिकी वीज़ा और विदेशी पत्रकारिता के नाम पर लुभाया गया।
- खुफिया एजेंसियां अब उन 75 जवानों से पूछताछ की तैयारी में हैं जिनसे संपर्क हुआ था।
भारत की केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान की एक नई जासूसी साजिश का पर्दाफाश किया है। जांच में पता चला है कि पाकिस्तान में बैठे ISI हैंडलरों ने नेपाल के रास्ते भारतीय सिम कार्ड मंगवाकर, भारतीय सेना के 75 जवानों और कुछ सरकारी कर्मचारियों से व्हाट्सएप पर संपर्क साधा था।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 28 अगस्त को लक्ष्मीनगर इलाके से नेपाल के बिरगंज निवासी प्रभात कुमार चौरासिया (43) को गिरफ्तार किया। उसके पास से 16 भारतीय सिम कार्ड मिले, जिनकी तकनीकी जांच में पता चला कि 11 सिम पाकिस्तान के लाहौर, बहावलपुर समेत कई शहरों से व्हाट्सएप पर सक्रिय थे।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, चौरासिया ने ये सिम कार्ड बिहार और महाराष्ट्र के लातूर जिले से अपने आधार कार्ड का इस्तेमाल करके खरीदे थे। इसके बाद वह इन्हें काठमांडू तस्करी कर ISI एजेंटों को सौंप देता था। बाद में इन्हीं सिम कार्डों से पाकिस्तान में बैठे हैंडलर भारतीय सेना और सरकारी अफसरों से संपर्क बनाकर जानकारी हासिल करने की कोशिश करते थे।
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के डीसीपी अमित कौशिक ने बताया कि चौरासिया 2024 में एक नेपाली बिचौलिए के जरिए ISI के संपर्क में आया था। उसे अमेरिकी वीज़ा और विदेशी पत्रकारिता के अवसर का लालच देकर फंसाया गया। इसके बदले उससे भारतीय सिम कार्ड भेजने और रक्षा अनुसंधान संगठन (DRDO) व सेना प्रतिष्ठानों से जुड़ी जानकारी जुटाने को कहा गया।
जांच में यह भी सामने आया कि चौरासिया ने बीएससी (आईटी) और कंप्यूटर हार्डवेयर-नेटवर्किंग में डिप्लोमा किया है। उसने पहले पुणे, लातूर, सोलापुर और दिल्ली की फार्मा कंपनियों में काम किया था। बाद में उसने 2017 में काठमांडू में एक लॉजिस्टिक कंपनी शुरू की, जो घाटे में चली गई। इसी आर्थिक तंगी के बाद वह ISI नेटवर्क के संपर्क में आ गया।
यह मामला अकेला नहीं है। इसी साल 27 मई को सीआरपीएफ के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर मोती राम जाट को दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था, जो पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) से गुप्त जानकारियां साझा कर रहा था। जांच में पाया गया था कि उसका हैंडलर भी सेना और सरकारी विभागों के 15 अन्य नंबरों से संपर्क में था।
फिलहाल खुफिया एजेंसियां उन 75 सैनिकों और अफसरों की सूची तैयार कर रही हैं जिनसे संपर्क हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी प्रत्यक्ष जासूसी सबूत का पता नहीं चला है, लेकिन सभी संबंधित यूनिट्स को सतर्क कर दिया गया है और जल्द पूछताछ की जाएगी।


