H-1B वीज़ा संकट पर राधिका गुप्ता: “आओ, अब लौट चलें”

एडेलवाइस एसेट मैनेजमेंट की CEO ने भारतीय छात्रों को अमेरिका की बजाय भारत में अवसर तलाशने की सलाह दी।

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H-1B संकट पर राधिका गुप्ता: "आओ, अब लौट चलें"

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीज़ा शुल्क को $100,000 सालाना करने के फैसले ने भारतीय छात्रों और पेशेवरों को चिंता में डाल दिया है। इसी बीच, एडेलवाइस एसेट मैनेजमेंट की CEO राधिका गुप्ता ने युवाओं को भारत में करियर बनाने की प्रेरणा दी और कहा कि 2025 का भारत अवसरों से भरा हुआ है।

मुख्य तथ्य

  • डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा शुल्क $100,000 सालाना कर दिया।
  • राधिका गुप्ता ने 2005 की यादें साझा कीं जब H-1B शर्तें आसान थीं।
  • उन्होंने बताया कि 2008 आर्थिक संकट के बाद कई भारतीय छात्रों ने वापसी की।
  • गुप्ता का कहना है कि 2025 का भारत करियर और उद्यमिता के लिए बेहतरीन है।
  • उन्होंने भारतीय छात्रों से कहा: “चिन अप, आओ, अब लौट चलें!”

अमेरिका में H-1B वीज़ा की लागत में भारी बढ़ोतरी के बीच भारतीय छात्रों और पेशेवरों में निराशा का माहौल है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के तहत अब कंपनियों को हर विदेशी कर्मचारी के लिए सालाना $100,000 चुकाने होंगे। इससे भारतीय प्रतिभाओं के लिए अमेरिका का रास्ता और मुश्किल हो गया है।

इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए एडेलवाइस एसेट मैनेजमेंट की CEO राधिका गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक पोस्ट साझा किया। उन्होंने 2005 का जिक्र किया, जब उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया था और H-1B वीज़ा नियम अपेक्षाकृत आसान थे। लेकिन 2008 की वैश्विक मंदी ने हालात बदल दिए, और उस समय भी कई भारतीय छात्र खुद को “उलझा हुआ और निराश” महसूस कर रहे थे।

H-1B संकट पर राधिका गुप्ता: "आओ, अब लौट चलें"
H-1B संकट पर राधिका गुप्ता: “आओ, अब लौट चलें”

गुप्ता ने लिखा कि भले ही कुछ छात्रों ने अमेरिका में वीज़ा बनाए रखा, अंततः वे भी भारत लौट आए और करियर बनाया। उन्होंने खुद भी वही राह चुनी और कहा कि भारत में करियर बनाना बेहद संतोषजनक रहा। उनके शब्दों में, “पर्सनली, मैं अब वापस नहीं जाना चाहूंगी।”

उन्होंने 2005 के भारत और आज के भारत की तुलना करते हुए कहा कि तब का भारत उदारीकरण के शुरुआती दौर से उभर रहा था, जबकि 2025 का भारत कहीं ज्यादा गतिशील है। यहां अब बेहतरीन नौकरी के अवसर, उद्यमिता का बढ़ता इकोसिस्टम और बड़े नेतृत्वकारी रोल मिल रहे हैं।

भारतीय छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा: “अगर आप इस समय अमेरिका में पढ़ रहे हैं और निराश हैं तो याद रखिए—जब एक दरवाज़ा बंद होता है, तो घर में कई और दरवाज़े खुलते हैं। 2025 का भारत 2005 के भारत से कहीं ज्यादा रोमांचक है। चिन अप। आओ, अब लौट चलें!”

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