यूक्रेन के साथ चार साल से जारी युद्ध के बीच रूस की आर्थिक हालत तेजी से कमजोर होती दिख रही है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के वरिष्ठ अधिकारी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लगातार आगाह कर रहे हैं कि इस साल गर्मियों तक देश एक गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस की तेल से होने वाली आय में भारी गिरावट आई है। जनवरी में तेल राजस्व पिछले साल के मुकाबले करीब 50 फीसदी तक गिर गया, जबकि बजट घाटा लगातार बढ़ रहा है। उपभोक्ताओं पर टैक्स बढ़ाने के बावजूद सरकारी खजाने पर दबाव कम नहीं हुआ है।
‘तीन-चार महीने में हालात बिगड़ सकते हैं’
मॉस्को के एक बिजनेस एग्जीक्यूटिव ने अखबार से कहा कि मौजूदा हालात में संकट “तीन या चार महीने” में सामने आ सकता है। उन्होंने बताया कि महंगाई बढ़ने से मांग घट रही है, कई रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं और हजारों कर्मचारियों की नौकरियां जा रही हैं।
रूस की आर्थिक मुश्किलों की जड़ें 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद लगे पश्चिमी प्रतिबंधों से जुड़ी हैं। युद्ध के लिए अर्थव्यवस्था को लामबंद करने से लेबर मार्केट तंग हो गया और महंगाई बढ़ी। हालात काबू में रखने के लिए केंद्रीय बैंक को लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखनी पड़ीं।
हालिया ढील के बावजूद कई उपभोक्ता क्षेत्रों में खर्च घटता जा रहा है।
बैंकिंग सेक्टर पर भी खतरा
ऊंची ब्याज दरों और कमजोर मांग से कंपनियां दबाव में हैं। कई जगह कर्मचारियों को पूरी तनख्वाह नहीं मिल रही, काम के घंटे घटाए जा रहे हैं या उन्हें अस्थायी छुट्टी पर भेजा जा रहा है। इसका सीधा असर कर्ज चुकाने की क्षमता पर पड़ रहा है।
एक रूसी अधिकारी ने दिसंबर में चेतावनी दी थी कि “बैंकिंग संकट भी संभव है और भुगतान न होने का संकट भी”। जून में रूसी बैंकों ने भी कर्ज संकट को लेकर खतरे की घंटी बजाई थी। उसी महीने उद्योगपतियों के संगठन के प्रमुख ने कहा था कि कई कंपनियां “डिफॉल्ट से पहले की स्थिति” में हैं।
सरकार समर्थित एक थिंक टैंक ने दिसंबर में कहा था कि अगर कर्ज की समस्या बढ़ी और जमाकर्ताओं ने पैसा निकालना शुरू किया, तो अक्टूबर तक बैंकिंग संकट आ सकता है। थिंक टैंक के प्रमुख दिमित्री बेलोउसॉव ने लिखा कि रूसी अर्थव्यवस्था 2023 की शुरुआत के बाद पहली बार स्टैगफ्लेशन के कगार पर पहुंच गई है।
तेल पर और प्रतिबंध संकट बढ़ा सकते हैं
आर्थिक हालात आगे और बिगड़ सकते हैं। यूरोप उन टैंकरों पर नए प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है, जिनका इस्तेमाल रूस तेल भेजने के लिए करता है। अमेरिका पहले ही रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी बड़ी तेल कंपनियों पर सख्ती कर चुका है।
कड़े प्रतिबंधों की वजह से रूस को अपना कच्चा तेल भारी छूट पर बेचना पड़ रहा है। ऊपर से वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट ने भी सबसे बड़े राजस्व स्रोत को चोट पहुंचाई है।
युद्ध खर्च जारी, रिजर्व घटता जा रहा
इन सबके बावजूद मॉस्को हथियारों और सेना में नई भर्ती पर भारी खर्च कर रहा है। सरकार ने घाटा पूरा करने के लिए अपने सॉवरेन वेल्थ फंड से पैसा निकाला है, लेकिन वह भी अब तेजी से खत्म हो रहा है।
मैदान में भी रूस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अनुमान है कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक करीब 12 लाख रूसी सैनिक मारे गए या घायल हुए हैं। नाटो के मुताबिक, सिर्फ दिसंबर में ही औसतन रोज 1,000 रूसी सैनिकों की मौत हुई।
‘यह जंग पुतिन के लिए बहुत बड़ी हो चुकी है’
यूरोपीय नेता मानते हैं कि रणनीतिक तौर पर भी रूस नुकसान में है। यूक्रेन के यूरोपीय संघ में शामिल होने की संभावना बढ़ रही है, नाटो का विस्तार हुआ है और यूरोप रक्षा खर्च तेजी से बढ़ा रहा है।
फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने हाल ही में कहा,
“यह कहना गलत है कि रूस ज्यादा जमीन पाने के लिए जंग जारी रखे हुए है। सच्चाई यह है कि यह जंग पुतिन के लिए इतनी बड़ी हो चुकी है कि वह इसे हार नहीं सकते। रूसी अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है—रिजर्व खत्म हो रहे हैं, महंगाई और ब्याज दरें दो अंकों में हैं। पुतिन के लिए युद्ध खत्म करना आसान नहीं है।”
बातचीत जारी, हमले भी जारी
युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत रुक-रुक कर चल रही है, लेकिन रूस अब भी यूक्रेन पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है, खासतौर पर ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाते हुए।
अबू धाबी में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच दो दिन की बातचीत भी हाल ही में बिना खास नतीजे के खत्म हुई। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि अमेरिका चाहता है कि जून तक युद्ध खत्म हो, और जल्द एक नया दौर शुरू हो सकता है।
फिलहाल, रूस की अर्थव्यवस्था और युद्ध—दोनों एक-दूसरे से इस कदर जुड़ चुके हैं कि किसी एक में झटका, दूसरे को भी हिला सकता है।


