पाकिस्तान द्वारा भारत पर सिंधु जल संधि (IWT) को कमजोर करने के आरोप लगाए जाने के कुछ दिनों बाद, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पड़ोसी देश पर तीखा बयान दिया है। चेन्नई के आईआईटी मद्रास में एक कार्यक्रम के दौरान भारत की पड़ोस नीति पर सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत को हर तरह के पड़ोसी मिले हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो लगातार समस्याएं पैदा करते हैं।
जयशंकर ने साफ कहा कि अगर कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद का रास्ता अपनाता है, तो भारत को अपने नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह अधिकार भारत कैसे इस्तेमाल करेगा, इसका फैसला भारत खुद करेगा, कोई बाहरी ताकत उसे निर्देश नहीं दे सकती।
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इनमें 1960 में बनी सिंधु जल संधि को “अस्थगन” में रखने का फैसला भी शामिल था। यह संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता से बनी थी और छह दशकों से भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे को नियंत्रित करती रही है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने वर्षों पहले जल साझा करने की व्यवस्था सद्भावना के आधार पर स्वीकार की थी। लेकिन अगर दशकों तक आतंकवाद जारी रहता है, तो अच्छे पड़ोसी जैसे रिश्ते की बात नहीं की जा सकती। उनके शब्दों में, “आप यह नहीं कह सकते कि मुझे पानी भी चाहिए और मैं आतंकवाद भी जारी रखूंगा।”
जयशंकर ने भारत की पड़ोस नीति को “सामान्य समझ” पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि जिन पड़ोसियों के साथ रिश्ते अच्छे हैं, उनके साथ भारत ने हमेशा सहयोग किया है। उन्होंने कोविड-19 के दौरान वैक्सीन सपोर्ट, यूक्रेन युद्ध के समय ईंधन और खाद्य सहायता, और श्रीलंका के आर्थिक संकट में 4 अरब डॉलर की मदद का उदाहरण दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि अब अधिकांश पड़ोसी देशों को यह एहसास हो रहा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि पूरे क्षेत्र के लिए फायदेमंद है। अगर भारत आगे बढ़ेगा, तो उसके पड़ोसी देश भी उसके साथ आगे बढ़ेंगे।
बांग्लादेश पर बोलते हुए जयशंकर ने बताया कि वह हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करने ढाका गए थे। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश इस समय चुनाव की ओर बढ़ रहा है और भारत उनके लिए शुभकामनाएं देता है। उम्मीद जताई गई कि हालात स्थिर होने के बाद क्षेत्र में पड़ोसी देशों के बीच आपसी समझ और बेहतर होगी।
इस यात्रा के दौरान जयशंकर ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारीक रहमान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शोक संदेश भी सौंपा। यह दौरा ऐसे समय हुआ, जब यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में कुछ तनाव देखा जा रहा है।
भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर भी अपनी चिंता पहले ही जाहिर की है। जयशंकर के बयान से साफ है कि भारत पड़ोसियों के साथ सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।


