क्या है STC, जिस पर आमने-सामने आए सऊदी अरब और UAE? समझिए पूरा विवाद

यमन के मुकाला पोर्ट पर सऊदी हमले के बाद खाड़ी के दो करीबी सहयोगियों के रिश्तों में आई खटास, केंद्र में है सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC)

Virat
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यमन के मुकाला पोर्ट पर सऊदी हमले के बाद UAE से बढ़ा तनाव।

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से रणनीतिक साझेदार माना जाता रहा है। यमन युद्ध से लेकर क्षेत्रीय राजनीति तक, दोनों अक्सर एक ही खेमे में खड़े दिखे। लेकिन दिसंबर के आखिरी दिनों में जो हुआ, उसने इस साझेदारी में दरार की आशंका बढ़ा दी है। विवाद की जड़ में है यमन का एक ताकतवर समूह—सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC)

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

30 दिसंबर को सऊदी अरब ने यमन के मुकाला पोर्ट पर हवाई हमला किया। सऊदी का दावा है कि उसने दो ऐसे जहाजों को निशाना बनाया, जो UAE के फुजैराह पोर्ट से आए थे और जिनसे हथियार व सैन्य वाहन उतारे जा रहे थे। सऊदी के मुताबिक, यह खेप STC के लिए थी और इन जहाजों का ट्रैकिंग सिस्टम भी बंद था।

सऊदी सेना ने कहा कि यह कार्रवाई “सीमित और जरूरी” थी, क्योंकि इन हथियारों से क्षेत्र की शांति और स्थिरता को खतरा पैदा हो सकता था।

UAE ने क्या जवाब दिया

UAE ने सऊदी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। अबू धाबी का कहना है कि जिस जहाज पर हमला हुआ, उसमें हथियार नहीं थे, बल्कि UAE की सेना के लिए रसद और जरूरी सामान था। UAE के अनुसार, इस सप्लाई की जानकारी सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन को पहले से थी और यह आपसी समन्वय के तहत भेजी गई थी।

यहीं से मामला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई का न रहकर राजनीतिक टकराव में बदल गया।

आखिर STC है क्या

STC यानी सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल यमन का एक शक्तिशाली अलगाववादी संगठन है। इसकी स्थापना 2017 में उन समूहों को मिलाकर की गई थी, जो दक्षिणी यमन को फिर से एक अलग देश के रूप में देखना चाहते हैं।

दरअसल, 1990 से पहले यमन उत्तर और दक्षिण यमन में बंटा हुआ था। एकीकरण के बाद भी दक्षिणी हिस्सों में अलग पहचान और स्वायत्तता की मांग कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। STC इसी भावना का राजनीतिक-सैन्य चेहरा है और दक्षिणी यमन के बड़े हिस्से पर इसका प्रभाव है।

STC को लेकर विवाद क्यों

माना जाता है कि STC को UAE का समर्थन हासिल है। हाल के महीनों में STC ने यमन में अपने सैन्य अभियानों को तेज किया है। इसके लड़ाकों ने हद्रामौत और अल-मह्रा जैसे तेल और गैस से समृद्ध इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है, जिससे यमन सरकार के सुरक्षा बलों को पीछे हटना पड़ा।

15 दिसंबर को STC ने अबयान के पहाड़ी इलाकों में हमला किया था। इसके बाद सऊदी अरब ने हद्रामौत के वादी नहाब इलाके में हवाई हमले किए। यानी जमीन पर चल रही यह खींचतान अब सऊदी-UAE संबंधों को भी प्रभावित करने लगी है।

आगे क्या बढ़ेगा तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव खाड़ी क्षेत्र के लिए चिंताजनक संकेत है। हालात ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सहयोगी देश भी अलग-अलग रणनीतिक रास्ते अपनाते दिख रहे हैं। कुछ विश्लेषक इसे 2017 के कतर संकट से जोड़कर देख रहे हैं, जब खाड़ी देशों के बीच बड़ा राजनयिक टकराव हुआ था।

फिलहाल साफ है कि STC सिर्फ यमन का आंतरिक मसला नहीं रह गया है। यह अब सऊदी अरब और UAE जैसे बड़े क्षेत्रीय खिलाड़ियों के रिश्तों की परीक्षा भी बन चुका है।

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