अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर दी गई प्रतिबंधों से छूट वापस लेने का ऐलान किया है। यह कदम 29 सितंबर से लागू होगा और भारत की रणनीतिक योजनाओं को बड़ा झटका दे सकता है।
मुख्य तथ्य
- चाबहार पोर्ट ईरान के सिस्तान-बालुचिस्तान प्रांत में स्थित है।
- भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने 2016 में चाबहार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
- 2018 में अमेरिका ने इस पोर्ट को प्रतिबंधों से छूट दी थी।
- अब ट्रंप प्रशासन ने यह छूट वापस ले ली है।
- भारत ने अब तक पोर्ट पर 25 मिलियन डॉलर का निवेश किया है।
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के चाबहार पोर्ट को दी गई छूट वापस लेने का बड़ा फैसला लिया है। यह छूट भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसी पोर्ट के माध्यम से भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक अपनी पहुंच बना रहा था। लेकिन अब 29 सितंबर से यह छूट खत्म हो जाएगी और प्रतिबंध लागू हो जाएंगे।
चाबहार पोर्ट, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के बेहद करीब स्थित है, जिसे चीन ने विकसित किया है। भारत इस पोर्ट को एक रणनीतिक विकल्प के तौर पर देखता रहा है। 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने मिलकर चाबहार ट्रांजिट समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 2018 से भारत पोर्ट का संचालन भी कर रहा है।
भारत ने अब तक छह मोबाइल हार्बर क्रेन और अन्य उपकरणों पर 25 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। दिसंबर 2018 से अब तक इस पोर्ट ने 90,000 से ज्यादा कंटेनर और 8.4 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक सामान को संभाला है। कोविड महामारी के दौरान भी इसी पोर्ट से मानवीय सहायता और अनाज अफगानिस्तान भेजा गया था।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के डिप्टी प्रवक्ता थॉमस पिगॉट ने कहा कि यह फैसला ट्रंप की “मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी” के तहत लिया गया है। उनका कहना है कि अब जो भी कंपनियां इस पोर्ट पर काम करेंगी, वे अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकती हैं।
भारत के लिए यह कदम एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि अब चाबहार के जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचना मुश्किल होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम चीन-पाकिस्तान की पकड़ को और मजबूत कर सकता है, जबकि भारत की रणनीतिक योजनाओं को बड़ा झटका लगेगा।


