ट्रंप ने फिर दोहराया ग्रीनलैंड पर दावा, डेनमार्क बोला— अमेरिका को कब्जे का कोई अधिकार नहीं

वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ट्रंप के बयान से यूरोप और लैटिन अमेरिका में चिंता बढ़ी, क्यूबा को लेकर भी सख्त संकेत

Virat
5 Min Read
डोनाल्ड ट्रंप

वेनेजुएला में रातों-रात की गई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख में दिख रहे हैं।
रविवार को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा—हमें ग्रीनलैंड चाहिए, बिल्कुल चाहिए।”

यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका पहले ही लैटिन अमेरिका में अपने बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर आलोचना झेल रहा है। ट्रंप के ताजा संकेतों ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध में अपनी भूमिका को किस हद तक फैलाना चाहता है।

ग्रीनलैंड क्यों अहम है अमेरिका के लिए

ट्रंप ने ‘द अटलांटिक’ को दिए इंटरव्यू में ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से बेहद अहम बताया।
उनका कहना था कि यह आर्कटिक द्वीप रूसी और चीनी जहाजों से घिरा हुआ है, और अमेरिकी सुरक्षा हितों के लिहाज से जरूरी है।

जब उनसे पूछा गया कि वेनेजुएला में हुई सैन्य कार्रवाई ग्रीनलैंड के लिए क्या संकेत देती है, तो ट्रंप ने जवाब दिया—
“उन्हें खुद ही इसे समझना होगा। मैं सच में नहीं जानता।”

व्हाइट हाउस ने इस बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।

डेनमार्क की कड़ी प्रतिक्रिया

ट्रंप के बयान के बाद डेनमार्क में चिंता साफ नजर आई।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड को अपने में मिलाने का कोई अधिकार नहीं है

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि डेनमार्क पहले से ही नाटो सहयोगी होने के नाते अमेरिका को ग्रीनलैंड में व्यापक सुरक्षा पहुंच देता रहा है।
प्रधानमंत्री ने ट्रंप से अपील की कि वे एक करीबी सहयोगी और ऐसे लोगों को धमकाना बंद करें, जिन्होंने साफ कह दिया है कि वे “बिक्री के लिए नहीं हैं।”

डेनमार्क ने इसी के साथ यूरोपीय संघ के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें कहा गया कि वेनेजुएला के लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार है

डॉन-रो डॉक्ट्रिन’ और पुरानी अमेरिकी नीति की वापसी

ट्रंप बार-बार 19वीं सदी के मुनरो डॉक्ट्रिन का हवाला दे रहे हैं, जो यूरोपीय उपनिवेशवाद के खिलाफ था, लेकिन बाद में लैटिन अमेरिका में अमेरिकी दखल का आधार बन गया।
उन्होंने मजाकिया लहजे में इसे अब डॉन-रो डॉक्ट्रिन” भी कहना शुरू कर दिया है।

पिछले महीने जारी अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में ट्रंप प्रशासन ने साफ कहा था कि पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका की प्रधानता बहाल करना उसकी प्राथमिकता है।

ग्रीनलैंड पर सैन्य बल से कब्जे का इशारा

ट्रंप इससे पहले भी ग्रीनलैंड को अमेरिका के अधीन लाने की बात कर चुके हैं और सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया है।
हाल के हफ्तों में उन्होंने रिपब्लिकन गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत बनाने की घोषणा की, जिन्होंने खुले तौर पर कहा कि वह ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने में मदद करेंगे।

एक सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें ग्रीनलैंड को अमेरिकी झंडे के रंगों में दिखाया गया और लिखा था “SOON”, ने भी डेनमार्क और ग्रीनलैंड में नाराजगी बढ़ा दी।

क्यूबा को भी सख्त चेतावनी

इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने क्यूबा को भी सख्त चेतावनी दी है।
रुबियो ने दावा किया कि वेनेजुएला में मादुरो की सुरक्षा में क्यूबाई एजेंसियों की बड़ी भूमिका थी और वहां की खुफिया व्यवस्था पर भी क्यूबा का असर है।

ट्रंप ने भी क्यूबा को “असफल देश” बताते हुए कहा कि अमेरिका वहां के लोगों की मदद करना चाहता है।

क्यूबा ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि यह खतरा पूरे क्षेत्र पर मंडरा रहा है।

पूरे क्षेत्र में बढ़ती बेचैनी

वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड और क्यूबा को लेकर आए बयानों ने अमेरिका के इरादों को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
डेनमार्क, यूरोप और लैटिन अमेरिका—तीनों जगह यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि अगला निशाना कौन हो सकता है।

Share This Article
2 Comments