ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकी से बढ़ी बेचैनी, डेनमार्क की PM ने कहा— ऐसा हुआ तो NATO खत्म हो जाएगा

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी बयानों पर यूरोप सख्त, डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने जताया विरोध

Virat
4 Min Read
Mette Frederiksen- Danish prime minister

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए ताजा बयानों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है। यूरोप में इस मुद्दे को हल्के में नहीं लिया जा रहा। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने की कोशिश की, तो इसका असर सिर्फ डेनमार्क तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी NATO की बुनियाद ही हिल सकती है।

प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन ने कहा कि NATO जैसे बड़े सैन्य गठबंधन की नींव इस बात पर टिकी है कि सदस्य देश एक-दूसरे के खिलाफ ताकत का इस्तेमाल नहीं करेंगे। अगर अमेरिका किसी दूसरे NATO देश के क्षेत्र पर सैन्य दबाव या हमला करता है, तो यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी पूरी सुरक्षा व्यवस्था को खत्म कर देगा।

ट्रंप के बयान से क्यों बढ़ी चिंता

डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बनने के बाद से ही कई बार ग्रीनलैंड को लेकर बयान दे चुके हैं। बीते साल जनवरी में पद संभालने के बाद उन्होंने खुलकर कहा था कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चाहिए। अब एक बार फिर उन्होंने इस मुद्दे को हवा दी है।

शनिवार को वेनेजुएला को लेकर दिए गए एक बयान के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगले 20 दिनों में ग्रीनलैंड पर “बात की जाएगी।” इस बयान के बाद आशंकाएं तेज हो गई हैं कि अमेरिका की ओर से किसी तरह का राजनीतिक या रणनीतिक हस्तक्षेप हो सकता है।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री का सख्त रुख

मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे की बात सिर्फ एक देश का मसला नहीं है। उनके शब्दों में, “अगर अमेरिका किसी NATO सहयोगी के खिलाफ सैन्य कदम उठाता है, तो सब कुछ वहीं रुक जाएगा। NATO और युद्ध के बाद बनी सामूहिक सुरक्षा की पूरी व्यवस्था खत्म हो जाएगी।”

उन्होंने यह भी साफ किया कि ट्रंप के बयानों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और डेनमार्क ऐसी किसी भी धमकी को स्वीकार नहीं करेगा।

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने भी जताई नाराज़गी

इस मुद्दे पर ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन ने भी ट्रंप की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अगर ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की कोशिश करता है, तो इसके विनाशकारी नतीजे होंगे।

नीलसन ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक, “हम ऐसी स्थिति में नहीं हैं कि कोई देश रातों-रात आकर यहां कब्जा कर ले। हम टकराव नहीं, सहयोग चाहते हैं।”

क्यों रणनीतिक रूप से अहम है ग्रीनलैंड

करीब 57 हजार की आबादी वाला ग्रीनलैंड 1979 से स्व-शासन का अधिकार रखता है। यहां अपनी सरकार और प्रधानमंत्री हैं, लेकिन रक्षा और विदेश नीति अब भी डेनमार्क के नियंत्रण में है।

ग्रीनलैंड में समय-समय पर डेनमार्क से पूरी तरह अलग होकर स्वतंत्र रक्षा और विदेश नीति की मांग उठती रही है। हालांकि, इसका मतलब अमेरिका के और करीब जाना नहीं है। अमेरिकी नियंत्रण को लेकर वहां आम लोगों में नाराज़गी और विरोध भी देखा जाता रहा है।

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के बयान ऐसे वक्त पर आए हैं, जब वैश्विक सुरक्षा संतुलन पहले ही कई मोर्चों पर दबाव में है। यही वजह है कि डेनमार्क और ग्रीनलैंड, दोनों ही इस मुद्दे पर अब खुलकर और सख्त रुख अपना रहे हैं।

Share This Article
Leave a Comment