ट्रंप का बयान: ताइवान पर चीन क्या करेगा, यह शी जिनपिंग पर निर्भर

न्यूयॉर्क टाइम्स को इंटरव्यू में बोले अमेरिकी राष्ट्रपति, बोले— अगर चीन ने कदम उठाया तो मुझे बहुत नाखुशी होगी

Virat
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान को लेकर एक बयान देकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा है कि चीन ताइवान के साथ क्या करता है, यह पूरी तरह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर निर्भर करता है।
न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि शी जिनपिंग ताइवान को चीन का हिस्सा मानते हैं और आगे क्या करना है, इसका फैसला वही करेंगे।

ट्रंप ने यह बातचीत बुधवार को दिए इंटरव्यू में कही, जिसे अखबार ने गुरुवार को प्रकाशित किया।
उन्होंने कहा, “वह (शी जिनपिंग) ताइवान को चीन का हिस्सा मानते हैं, और वह आगे क्या करेंगे, यह उन्हीं पर निर्भर है।”

हालांकि ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि उन्होंने शी जिनपिंग से अपनी असहमति जता दी है। उनके मुताबिक, अगर चीन ताइवान को लेकर कोई बड़ा कदम उठाता है तो वह इससे “बहुत नाखुश” होंगे। ट्रंप ने यह उम्मीद भी जताई कि चीन ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा।

वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच बढ़ता तनाव
इस बयान के बीच चीन ने अमेरिका की हालिया कार्रवाइयों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। खास तौर पर वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन को लेकर चीन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।

चीन के स्टेट काउंसिल ताइवान अफेयर्स ऑफिस के प्रवक्ता चेन बिनहुआ ने कहा कि अमेरिका ने एक संप्रभु देश के खिलाफ बल प्रयोग किया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चीन इसका “कड़ा विरोध” करता है।

ताइवान को लेकर चेतावनी
चेन बिनहुआ ने ताइवान के भीतर स्वतंत्रता समर्थक समूहों को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ताइवान की आज़ादी के समर्थक किसी “रेड लाइन” को पार करते हैं, तो चीन कड़े कदम उठाएगा और सीधी कार्रवाई करेगा।

विश्लेषकों की चिंता
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाई चीन को ताइवान के मुद्दे पर ज्यादा आक्रामक बना सकती है। उनका तर्क है कि जिस तरह अमेरिका ने वेनेजुएला में अपने कदमों को “कानून व्यवस्था से जुड़ी कार्रवाई” बताया, वह चीन की ताइवान को लेकर अपनी कानूनी दलीलों से मेल खाता है।

ब्रिटेन की संसद की विदेश मामलों की समिति की अध्यक्ष एमिली थॉर्नबेरी ने भी अमेरिका की इस कार्रवाई पर चिंता जताई है। बीबीसी रेडियो 4 से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई कानूनी कार्रवाई नहीं थी और इससे चीन और रूस जैसे देशों को गलत संदेश जा सकता है।

ताइवान पर अलग-अलग नजरिया
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और कहता है कि उसका पुनर्एकीकरण होना चाहिए। वहीं ताइवान का कहना है कि वहां की जनता को अपने भविष्य का फैसला खुद करने का अधिकार है।
ताइवान की अपनी लोकतांत्रिक सरकार, सेना और राजनीतिक व्यवस्था है।

अधिकांश पश्चिमी देश, जिनमें ब्रिटेन भी शामिल है, चीन को राजनयिक रूप से मान्यता देते हैं, लेकिन ताइवान की स्थिति में किसी भी तरह के एकतरफा बदलाव का विरोध करते हैं, खासकर अगर वह बल प्रयोग के जरिए हो।

 

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