दिल्ली कैपिटल्स ने WPL 2026 फाइनल में वह स्कोर खड़ा किया, जो आमतौर पर ट्रॉफी दिला देता है। 203/4 — महिला प्रीमियर लीग फाइनल का अब तक का सबसे बड़ा टोटल। स्टेडियम का माहौल, दिल्ली का आत्मविश्वास और जेमिमा रोड्रिग्स की फॉर्म, सब कुछ उनके पक्ष में था।
लेकिन फाइनल की रात रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने एक बार फिर कहानी बदल दी।
स्मृति मंधाना और जॉर्जिया वोल ने बिना घबराए, बिना जल्दबाज़ी के, इस बड़े लक्ष्य का पीछा किया और RCB को छह विकेट से जीत दिलाकर दूसरा WPL खिताब जिता दिया। दिल्ली के लिए यह चौथा फाइनल था — और चौथी बार ट्रॉफी हाथ से फिसल गई।
दिल्ली का बड़ा स्कोर, लेकिन अधूरी राहत
टॉस भले ही दिल्ली के पक्ष में न रहा हो, लेकिन बल्लेबाज़ी में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। जेमिमा रोड्रिग्स ने 37 गेंदों में 57 रन बनाए। उनकी पारी में ताकत कम और टाइमिंग ज़्यादा दिखी। कवर और पॉइंट के बीच निकलती गेंदें इस बात का संकेत थीं कि वह अपने खेल को लेकर पूरी तरह साफ थीं।
दिल्ली 200 के पार पहुंच गई। ऐसे स्कोर के बाद आमतौर पर गेंदबाज़ी यूनिट से सिर्फ़ अनुशासन की उम्मीद होती है। यहीं दिल्ली थोड़ी पीछे रह गई।
मंधाना ने दबाव को आने ही नहीं दिया
RCB की पारी की शुरुआत तेज़ थी, लेकिन असली नियंत्रण धीरे-धीरे स्मृति मंधाना के हाथ आया। शुरुआती ओवरों में वह ज्यादा गेंदें नहीं खेलीं, लेकिन जब उन्होंने रफ्तार पकड़ी तो दिल्ली के गेंदबाज़ों के पास जवाब कम पड़ने लगे।
नंदिनी शर्मा के एक ओवर ने मैच की दिशा साफ कर दी — एक चौका, फिर घुटनों पर बैठकर खेला गया सिक्स। इसके बाद मंधाना का फुटवर्क, क्रीज़ में मूवमेंट और गैप खोजने की समझ साफ दिखती रही। 23 गेंदों में अर्धशतक और फिर भी चेहरे पर वही ठहराव।
मरिज़ान काप से लेकर स्नेह राणा तक, कोई भी ब्रेकथ्रू नहीं दिला सका।
जॉर्जिया वोल की अहम भूमिका
इस पारी को सिर्फ़ मंधाना की शो नहीं कहा जा सकता। जॉर्जिया वोल ने 79 रन बनाकर रन-चेज़ को संतुलन दिया। उन्होंने बीच के ओवरों में जोखिम कम रखा, जिससे अंत में दबाव RCB पर नहीं आया।
दोनों की साझेदारी ने दिल्ली को धीरे-धीरे मुकाबले से बाहर कर दिया।

गेंदबाज़ी में फर्क साफ दिखा
दिल्ली ने रन तो बना लिए, लेकिन गेंदबाज़ी में वह धार नहीं दिखी, जो फाइनल जीतने के लिए चाहिए होती है। इसके उलट RCB की ओर से लॉरेन बेल ने एक बार फिर दिखाया कि डॉट बॉल्स कितनी कीमती होती हैं। विकेट भले न मिले हों, लेकिन 4.75 की इकॉनमी ऐसे मैच में फर्क डाल देती है।
एक और फाइनल, वही नतीजा
दिल्ली कैपिटल्स लगातार चौथी बार फाइनल में पहुंची, लेकिन ट्रॉफी फिर भी दूर रही। दूसरी ओर RCB के लिए यह जीत सिर्फ़ एक और खिताब नहीं, बल्कि यह साबित करने का तरीका भी था कि बड़े मैचों में संयम और स्पष्टता कितनी अहम होती है।
संक्षिप्त स्कोर:
दिल्ली कैपिटल्स 203/4 (जेमिमा रोड्रिग्स 57, लॉरा वोल्वार्ड्ट 44)
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 204/4 (स्मृति मंधाना 87, जॉर्जिया वोल 79)
RCB ने 6 विकेट से जीत हासिल की


